आदरणीय नीतीश कुमार जी,
आशा है आप स्वस्थ और सानंद होंगे.
मैं बिहार केंद्रीय विश्वविध्यालय को लेकर चल रहे विवाद के संदर्भ में आपसे कुछ अनुरोध करना चाह रहा था. इससे पहले कुछ बातें और जो संदर्भ के लिए जरूरी है.
मैं बिहार के औरंगाबाद जनपद के एक छोटे से गाँव सिमरी बाला का रहनेवाला हूँ. और गाँव का पहला ऐसा युवक रहा हूँ, जो किसी विश्वविध्यालय के दरवाजे तक पहुँचा हो. अध्ययन और अध्यापन के सिलसिले में पिछले ढाई दशक से उत्तर प्रदेश में हूँ, किन्तु हमेशा अपने बिहार के बारे में सोचा करता हूँ. जिस मिट्टी में इंसान जन्म लेता है उसका कर्ज कभी नहीं भूल पाता. मेरा भी अपने बिहार के प्रति कर्ज है,जिसे उतरने के लिए वैचारिक रूप से ही सही हमेशा तत्पर रहता हूँ.
नीतीश जी,हम और आप जानते हैं कि बिहार में कुशासन का एक लंबा दौर रहा है. जिस राज्य की तरफ आज पूरे देश की निगाहें लगी है, वहाँ कलतक सांस लेना भी मुश्किल था. आज बिहार की सड़कों और कानून व्यवस्था तथा आपके सुशासन की लोग तारीफ करते हैं, राजनीति में आपकी एक अलग बेदाग छवि है. किन्तु मैं समझता हूँ कि यह सब बातें सिर्फ आपके उत्साह वर्धन के लिए है ना कि महिमामंडन के लिए. हमारे आपके सामने बिहार की तरक्की, शिक्षा और रोजी-रोटी के लिए बिहार से बाहर रह रहे उन करोड़ों बिहारियों को सम्मान दिलाने की भी चुनौती है, जो आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं और असम से लेकर महाराष्ट्र तक हर रोज गोली और गालियाँ खाते हैं. आप्क पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री बिहारियों के लिए गाली के प्रतीक बन चुके थे.
नीतीश जी, आज उन करोड़ों बिहारियों को आजीविका, शिक्षा और सम्मान दिलाने की चुनौती आपके कंधों पर है. ऐसे में हर एक कदम आपको काफी सोचकर उठाना चाहिए,जिससे कि हमारे सपनों पर पानी न फिर जाए. मैने नालंदा और बिहार केंद्रीय विश्वविध्यालय को लेकर प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया की रिपोर्ट देखी है. मुझे जानकार बहुत दुख हुआ कि वर्ष 2009 में संसद में पारित केंद्रीय विश्वविध्यालय अधिनियम के बाद से आजतक बिहार में विश्वविध्यालय के लिए उपयुक्त जमीन नहीं मिल सकी. मुझे पता लगा कि केंद्र सरकार मोतिहारी में विश्वविध्यालय नहीं बनाना चाहती,क्योंकि वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर नहीं आता. मैं समझता हूँ कि विश्वविध्यालय को एक राष्ट्रीय स्वरूप देने के लिए जरूरी होता है कि उसकी स्थापना ऐसी जगह हो जहाँ देश और दुनियाँ से आनेवाले विशेषग्यों और छात्रों को कोई असुविधा ना हो.
अगर केन्द्र मोतिहारी को नहीं चाहती है तो ना सही, हमारी उदारता तो इसी में हैकि हम कपिल सिब्बल से कह दें कि पूरा बिहार आपका है आप जहाँ चाहें विश्वविध्यालय बना दें. मुख्यमंत्री जी,उन लाखों बिहारी युवाओं को केंद्रीय विश्वविध्यालय चाहिय,जो उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए बिहार से बाहर दर-दर की ठोकरें खाते फिरते हैं और उंहें अपमान का घूँट पीकर शिक्षा प्राप्त करनी पड़ती है.
नीतीश जी, आपकी राजनीतिक छवि और कद कपिल सिब्बल से कहीं बहुत बड़ा है. और फिर बिहार की तरक्की के लिए बहुत बार आपको झुंकना पड़ेगा, फिर फलदार वृक्ष हमेशा झुक जाते हैं. बिहार की तरक्की में कहीं से भी दलगत राजनीति आड़े नहीं आनी चाहिए. अगर मोतिहारी की जगह बोधगया या पटना के कहीं आसपास ही जगह मिल जाए तो क्या बुरा.
नीतीश जी, बिहार के बौद्धिकों और युवाओं की तरफ से मैं आपसे अपील करता हूँ कि आप केंद्र को तत्काल यह संदेश भिजवा दें कि केंद्र जहाँ चाहे बिहार में एक नहीं दो-दो केंद्रीय विश्वविध्यालय की स्थापना कर ले. हम जमीन देने को तैयार हैं. और अगर अपने मोतिहारी के लोगों को विश्वविध्यालय खोलने का वचन दिया है तो वहाँ एक भव्य राज्य विश्वविध्यालय की स्थापना कीजिए, जो केंद्र के लिए भी आदर्श बने.
हम इस मामले में आपकी पहल की प्रतीक्षा करेंगे.
डा निरंजन सिंह
प्रवक्ता
एस.एस.वी.एम.कालेज, इलाहाबाद
पूर्व पत्रकार, हिन्दुस्तान, अमर उजाला
पूर्व सदस्य,राज्य ललित कला अकादमी,उत्तर प्रदेश
संपर्क: 1/2 ए सुभाष नगर नया माम्फोर्डगंज, इलाहाबाद-211002
फोन; 09455998412 / 09196110677
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