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शनिवार, 28 जनवरी 2012

मेधा पाटकर टाइम्स ऑफ़ इंडिया पटना कर्मियों के समर्थन में

आज टाइम्स ऑफ़ इंडिया के प्रिंटिंग प्रेस की बंदी के कारण हटाये गए ४४ कर्मचारी उस वक़्त हैरान रह गए जब पटना के फ्रेज़र रोड स्थित उनके धरनास्थल पर नर्मदा बचाओ आन्दोलन की नेत्री और टीम अन्ना की महत्वपूर्ण सदस्य और भारत में
अहिंसक जन - आंदोलनों की पहचान सी बन चुकी मशहूर शख्शियत बन चुकी मेधा पाटकर उनके धरना-स्थल पर अपने जनांदोलन के अन्य साथियों के साथ अचानक पहुँच गई.

मालूम हो कि लोकशक्ति अभियान की अपनी बिहार यात्रा के क्रम में वे बिहार में अररिया, फारबिसगंज, कोसी क्षेत्र से होती हुई मुजफ्फरपुर के मरवन में जहां के लोगों ने अपनी लड़ाई के बल पर बालमुकुन्द कम्पनी के एस्बेस्टस कारखाने को
हटाने और भगाने में सफलता प्राप्त की और कांटी थर्मल पॉवर स्टेशन के आस पास के लोगों ने पुलिस और प्रशासन के साथ दो-दो हाथ किये सहित गोपालगंज और सिवान की यात्रा और सभाओं के बाद आज पटना में उनको शहरी गरीबों की एक महत्ती सभा को संबोधीत करना था. इसी क्रम में फ्रेज़र रोड के रास्ते से गुजरते हुए उन्होंने जब धरना स्थल पर टाइम्स ऑफ़ इंडिया के नौकरी से हटाये गए कर्मियों को देखा तो वहां उनकी और उनकी टीम के अन्य साथियों की गाड़ियाँ हठात रुक गई.

मेधा पाटकर को वैसे तो पहले से ही इस धरने की पुरी जानकारी टाइम्स ऑफ़ इंडिया निउज्पेपर एम्प्लाइज यूनियन के अध्यक्ष, बिहार श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के महा-सचिव और भारतीय पत्रकार परिषद् के सदस्य,अरुण कुमार और यूनियन
के सचिव लाल रत्नाकर के माध्यम से थी मगर इस यात्रा के कार्यक्रम में उनका यहाँ धरने पर आना पूर्व-निर्धारित नहीं था.

नर्मदा नेत्री ने बताया कि शायद मीडिया में खबरों के नहीं छपने या विपरीत ख़बरें छपने की आशंका की वजह से ऐसा नहीं
किया गया हो मगर जब वे यहाँ से गुजर रही थीं तो उन्होंने निश्चय किया कि चाहे जो भी हो उन्हें धरना-स्थल पर रुकना ही है और पीड़ित मजदूर साथियों से बात करने और उनको संबोधीत करने के बाद ही आगे बढ़ना है. और इस तरह वे वहां धरने पर पहूँच गई.

मजदूरों से बातचीत के क्रम में जब उन्हें यह पता चला कि मनीसाना वेज बोर्ड के अनुसार पत्रकार और गैर पत्रकार कर्मियों के संघर्ष के क्रम में इलाज के अभाव में दो मजदूरों आनंद राम और यूनियन के अस्सिस्टेंट सेक्रेट्री दिनेश कुमार सिंह की मौत हो चुकी है, प्रेस की बंदी के बाद बेरोजगारी के तनाव से एक मजदूर साथी चंदू पागल होने के कगार पर है, कईयों के परिजनों का इलाज नहीं हो पा रहा है, बच्चों की पढाई बंद हो गई है, बेटियों की शादी रुकी पड़ी है और उनमे से कुछ की जिनकी शादियाँ ठीक हो भी गई हैं उनकी शादी में पैसे का अभाव आड़े आ रहा है यह जानकर मेधा पाटकर भावुक हो उठीं.

मेधा को प्रेस कौंसिल ऑफ़ इंडिया के सदस्य, साथी अरुण कुमार ने पूरे मामले की जानकारी दी और सभी मजदूर साथियों से परिचय कराया.एक-एक मजदूर से मेधा ने उनका दुःख दर्द सुना और बाद में उनको संबोधित भी किया.

अपने संबोधन में मेधा पाटकर ने मजदूरों को उनके धैर्य, साहस और अपने जुझारूपन के ज़ज्बे को बनाये रखने के लिए शाबाशी देते हुए अपने साथियों और अपने आन्दोलन की ओर से हर संभव समर्थन देने का आश्वासन भी दिया और बताया कि पहले से भी उनकी ओर से इस आन्दोलन को उनकी ओर से नैतिक और कानूनी सहायता के रूप में समर्थन मिल रहा है और आगे भी यह समर्थन और सहयोग जारी रहेगा.

मेधा के इस समर्थन से अभिभूत धरनार्थी मजदूर अपने बैनर के साथ मेधा के समर्थन में शहरी गरीबों की सभा में भी अपनी शिरकत की.

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